Thursday, 1 March 2018

Holi kyu manate hai, Holi ke scientific faide

Holi festival तेव्हार रंगो का 


फागुन महीने में भारत का मशहूर तेव्हार Holi आता है | माना जाता है की इसी दिन असुर हिरण्यकशिपु (Hiranyakashipu) ने भगवन की भक्ति कर रहे अपने ही संतान प्रह्लाद (Prahlad) को मरने के लिए उनकी बहन होलिका को अपनी गोद में Prahlad को लेकर बैठाया और आग लगाई गई।  होलिका जिसे अग्नि से नहीं जलने का वरदान था फिर भी होलिका अग्नि में जल कर भसम हो गई और भक्त Prahlad सही सलामत आग से बहार आ गया और इसी खुसी में लोग दूसरे दिन लोग एकदूसरे को रंग लगा कर खुसिया मानते है।  ये थी होली की कहानी।

holika dahan
holika dahan


हर हिन्दू तेव्हार में कोई न कोई विज्ञान छुपा होता है।  होली का धार्मिक महत्व है लेकिन उससे भी जायदा वैज्ञानिक महवत्व है। आज आप इस आर्टिकल में संछेप में होली का विज्ञान समझने वाले है तो इससे अंत तक जरूर पढ़े जिससे आप होली के दिन वैज्ञानिक फायदे भी उठा पायगे।

holi
happy holi to everyone

1. नकारात्मकता से मुक्ति :- होलिका दहन वैचारिक रूप से उस बाद का प्रतीक है की जो हमारे मन में बुरे या नकारात्म विचार है उससे होली के अग्नि में समर्पित कर दे, हमेसा सच की एवं धरम की हे जित होती है ऐसा दृश्टिकोण  है और मनोविकार से मुक्ति मिलती है।  होलिका दर्शन करने से हमारा मान सुद्ध एवं निर्मल होता है और नकारत्मकता से मुक्ति मिलती है। 

2 . होली की अग्नि से रोगपरिकारक सकती बढ़ती है :- होली के समय सर्दी की मौसम अंत में होती है और गमरी की मौसम की सुरुवात होती है। जॉब दो मौसम का अनुभव एक साथ होता है तो हमारे सरीर को रोग होने लगता है और हम बीमार हो जाते है।  ऐसे में होलिका दर्शन करने से हमरे सरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और हम बीमार नहीं पड़ते। छोटे बचो को भी इस होलिका दहन  की दर्शन कराई जाती है उसके पीछे भी ये वैज्ञानिक कारन छिपा हुआ है।  Holi में से मिल रही पॉजिटिव ऊर्जा हमारे सरीर में रोगपतिकारक छमता बढाती है और हम तन्दुरुष जीवन जी पाते है।


अब जानते है होलाष्टक (Holashtak) के पीछे का रहस्या

पुराने समय में होली से पहले गेहू काटने का समय होता था इस दौरान अगर सुबह कार्य करते है तो फसले  काटने  का वक़्त नहीं मिलता था और इसी वझे से दुसरो के  करियो में भी नहीं शामिल हो पाते थे।  इसलिए ८ दिन ऐसे सेट किय गए होंगे जिसमे की कोई सुबह कार्य ना हो और फ्री होकर holi का तेव्हार भी ठीक तरह से मना सके।

colour से खेलने का महत्व

होलिका दहन के दूसरे दिन लोग एक दूसरे पर  colour उड़ाते है इससे अगर किसी दूसरे लोगो से नाराजगी या दुश्मनी हो तो दूर हो जाती है। सबको  एक साथ मिलझुक कर रहने की प्रेरणा मिलती है। पहले के समय में सिंथेटिक रंग की जगह केसू के फूल का प्रयोग किया जाता था जिससे सोंदर्ये वरदक मन जाता है।  स्किन की समस्या से निजाद दिलाने में ये फूल उपोयगी माना जाता है।
पहले के समय में हमरे ऋषिमुनि बहोत ही बुद्धिमान थे तरह तरह के प्रोयोग कर के अच्छा परिणाम मिलने पर लोगो के सामने रखते थे आज पूरी दुनिया में उस विचार को या ओसधि को अपनाने लगे है। योग जिसे योगा कहते है वो भी हमरे ऋषि मुनि की एक शोध है। 












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